जाला - मोरल स्टोरी (Jaala - Moral Story)

Jaala - Moral Story


  जाला - मोरल स्टोरी  (Jaala - Moral Story)


ऊँची पहाड़ी पर एक मंदिर था। लोग दूर-दूर से वहां दर्शन करने आते थे। 

राम और श्याम भी मंदिर के दर्शन करके जब वापस अपने गांव की ओर चले तब तक तो शाम ढल चुकी थी। वे दोनों तेजी से अपने कदम बढ़ाने लगे।

दोनों अभी कुछ ही आगे बढ़े थे कि उन्हें महसूस हुआ कि कोई उनका पीछा कर रहा है। उन्होंने मुड़कर देखा तो तीन-चार लुटेरे उनके पीछे थे।

दोनों मित्रों ने बचने के लिए तेजी से दौड़ लगा दी। लुटेरे भी उनके पीछे-पीछे भागे। तब तक चारों ओर अंधेरा छा चुका था। दोनों मित्र भागते-भागते एक खंडहरनुमा मंदिर के पास पहुंचे और जान बचाने के लिए मंदिर के अंदर जाने की बात सोची। एक ने जेब से दियासलाई निकालकर जलाई। जैसे ही वे अंदर जाने लगे, उन्होंने दियासलाई की रोशनी में देखा कि द्वार पर मकड़ी का जाला लगा हुआ है।

एक मित्र बोला, “मित्र, हमें मकड़ी के जाले को नहीं तोड़ना चाहिए। यह तो मकड़ी का घर है। इसे उसने काफी मेहनत से बनाया होगा।"

दूसरा मित्र भी  अपने मित्र की बात से सहमत था। तब दोनों मुश्किल से दीवार फांदकर अंदर गए। कुछ ही देर में वे लुटेरे भी वहां पहुंच गए। उनक उनका सरदार बोला "जरूर वे इस मंदिर के अंदर गए होंगे, चलो खोजें।"

एक लुटेरे ने  दियासलाई जलाई तो द्वार पर मकड़ी का जाला दिखाई दिया। जाला  देखकर लुटेरों का सरदार पुन: बोला, “वे दोनों इस मंदिर में नहीं छिपे हैं।  अगर अंदर जाते तो यह  मकड़ी का जाला दरवाजे पर नहीं होता। चलो यहां से।" और लुटेरे चले गए 

मकड़ी के प्रति दया ने दोनों मित्रों की जान बचा दी थी।


कथा-सार

 दया मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है, अतः हर जीव के प्रति दयाभाव रख़ना चाहिए। दयालु  प्रवृत्ति के मित्रों ने मकड़ी का घर समझकर वह जाला नहीं  तोडा था। उन्हें स्वप्न में भी यह गुमान नहीं था कि ऐसा करना उनका  प्राणरक्षक  बन जाएगा। याद रखें! अच्छाई के बदले में अच्छाई ही मिलती है।


 जाला - मोरल स्टोरी  (Jaala - Moral Story)


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