झूठ बोलने का फल (Jhuth Bolnay ka Fal) (Moral Story in Hindi)



झूठ बोलने का फल (Jhuth Bolnay ka Fal) (Moral Story in Hindi)

श्याम एक चरवाहा था। वह रोज गांव वालों की भेड़ों को चराने चरागाह में ले जाता और शाम को वापस ले आता। वह बहुत ही शरारती था और अक्सर झूठ बोलकर लोगों को परेशान किया करता था।

 एक दिन उसे एक नई शरारत सूझी। जब वह भेड़ों को चरा रहा था तब अचानक चिल्लाने लगा, "शेर आ रहा है, शेर आ रहा है, भेड़ों को खा जाएगा, मुझे भी खा जाएगा।"

यह आवाज सुनकर गांव के लोग अपना-अपना काम छोड़कर लाठी, भाले, बरछे लेकर उसी तरफ दौड़ पड़े। जब गांव वाले निकट आए तो श्याम जोर-जोर से हंसने लगा। बोला, “मैंने तो मजाक किया था।"
गांव वाले भुनभुनाते हुए वापस लौट गए।

उसे अपनी इस हरकत पर बड़ा मजा आया। अगले दिन उसने फिर से वैसा ही किया। इस बार भी गांव वाले उसकी मदद करने को दौड़ पड़े, लेकिन जब उन्हें पता चला कि इस बार भी चरवाहे ने झूठ बोला है तब वे लौट गए। इस तरह श्याम ने 'शेर आया, शेर आया' करके गांव वालों को कई बार तंग किया।

एक दिन जब वह भेड़ें चरा रहा था तब वास्तव में अचानक एक शेर दहाड़ता हुआ वहां आ पहुंचा। श्याम ने मदद के लिए गांव वालों को पुकारा, किंतु इस बार कोई भी गांव वाला नहीं आया। सब अपने-अपने कामों में जुटे रहे।

श्याम इस बार सचमुच मदद के लिए पुकार रहा था, लेकिन गांव वाले झूठ ही समझ रहे थे। कुछ ही देर में शेर ने श्याम का काम तमाम कर दिया। इस तरह चरवाहे को झुठ बोलने का फल मिल गया। 


कथा-सार (Moral of the Story)

- झठ बोलना बुरी आदत है, फिर लोगों को परेशान करके अपने आनंद लिए झुठ बोलने को क्या कहें! श्याम बेशक खेल-खेल में ऐसा करता था। शेर...आया..शेर आया' का झूट उसी पर भारी पड़ेगा-यह वह नहीं जानता था। जब वास्तव में शेर आया तब उसे मदद नहीं मिली और वह मौत के गाल में समा   गया। सत्य ही है कि झूठ बोलने का परिणाम जानलेवा भी हो सकता है।

        

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